म्यूचुअल फंड क्या होता है?
एक उदाहरण देकर आप को समझाता हूं कि जैसे कई सारे दोस्त हैं उन्होंने थोड़ा-थोड़ा कर कर एक पूंजी इकट्ठा कर ली है और अब वह चाहते हैं कि वह इसको इन्वेस्ट करें लेकिन उनको यह जानकारी नहीं है की वह इसे कहां इन्वेस्ट करें. तो उन्होंने इसके लिए एक एक्सपर्ट से मिले और कहा कि आप हमारे पैसे को इन्वेस्ट करो, उसके बदले हम आपको फीस देंगे और इस निवेश में हुआ फायदा या नुकसान हमारा होगा.
इस तरह के निवेश को साधारण भाषा में म्यूचुअल फंड कहते हैं. आपने अपने पैसे म्यूचुअल फंड को दे दिए. म्यूचुअल फंड आप के पैसों को सही जगह पर इन्वेस्ट करेगा जो भी लाभ या हानि होगी वह आपकी. लेकिन आपको इसके लिए फीस चुकानी होगी.
इस तरह के निवेश को साधारण भाषा में म्यूचुअल फंड कहते हैं. आपने अपने पैसे म्यूचुअल फंड को दे दिए. म्यूचुअल फंड आप के पैसों को सही जगह पर इन्वेस्ट करेगा जो भी लाभ या हानि होगी वह आपकी. लेकिन आपको इसके लिए फीस चुकानी होगी.
म्यूचुअल फंड शेयर बाजार से कितना अलग:
अगर हम म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करते हैं तो हमें शेयर्स ना मिलकर यूनिट्स मिलते हैं. शेयर मार्केट में शेयर के द्वारा निवेश किया जाता है जबकि म्यूच्यूअल फंड में यूनिट्स के द्वारा.
अगर आप बिना डीमैट अकाउंट के म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करना चाहते हैं तो एक सिंपल सा फॉर्म भर कर और थोड़ी बहुत फॉर्मेलिटी पूरा करके आप भी म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट कर सकते हैं.
इसके अलावा अगर आप डीमैट में करना चाहें तो डीमेट सकते हैं सकते हैं परंतु अकाउंट से भी म्यूच्यूअल फंड में इन्वेस्ट कर सकते हैं परंतु म्यूचुअल फंड के लिए डीमैट का होना जरूरी नहीं है.
अच्छा है कि आप लंबे समय के लिए इनवेस्टमेंट करें और इक्विटी को तवज्जो दे लंबे समय के लिए इक्विटी फंड में इन्वेस्ट करना आपके लिए फायदेमंद रहेगा.
थीमेटिक फंड:
थीमेटिक फंड:
ज्यादातर यह डेट और इक्विटी में होते हैं यह कई तरह के हो सकते हैं.
अगर इक्विटी थीमेटिक फंड की बात करें तो यह ऐसे फंड होते हैं जिसमें आप अंतर्राष्ट्रीय निवेश कर सकते हैं. थीमेटिक फंड स्टार्ट अप कंपनी, स्माल इंटरप्राइजेज, फार्मा सेक्टर, मल्टीनेशनल कंपनियों के या फिर FMGC के भी हो सकते हैं.
डेट थीमेटिक फंड की बात करते हैं इसमें भी ठीक हो सकती है जैसे एक ही गवर्नमेंट सिक्योरिटी कंपनियों, तथा अन्य तरह के बांड में निवेश कर सकते हैं आप इसमें कंपनियों के रेटिंग के हिसाब से निवेश कर सकते हैं इक्विटी फंड की तुलना में यह कम जोखिम भरे होते हैं शेयर मार्केट के उतार-चढ़ाव पिंपल ज्यादा फर्क नहीं पड़ता.
मतलब थीमेटिक फंड में थीम अलग अलग हो सकती है निवेशकों को चाहिए कि वह निवेश करने से पहले फंड के बारे में पूरी जानकारी ले ले.
इन फंड्स में पैसा डूबने का खतरा ज्यादा रहता है तथा रिटर्ंस की भी संभावना बहुत ज्यादा है. मतलब आप इसमें कमा भी सकते हैं और आपके पैसे डूबने की भी संभावना है
इस तरह के फंड्स में अपने कुल निवेश का 5 से 7% तक ही निवेश करना चाहिए. क्योंकि इसमें उतार-चढ़ाव बहुत ज्यादा होते हैं. अगर किसी वजह से बाजार में अचानक गिरावट आ जाती है तो आपकी पूरी पूंजी नहीं जाएगी और आप अचानक होने वाले घाटे से बच जाएंगे. इसलिए कभी भी अपना शतप्रतिशत निवेश थीमेटिक फंड में नहीं करना चाहिए. इस तरह के फंड्स में लंबी अवधि के लिए निवेश करना बेहतर रहता है. लंबी अवधि में रिटर्न मिलने की संभावना अच्छी होती है.
पावर ऑफ कंपाउंडिंग:
इस तरह के फंड्स में अपने कुल निवेश का 5 से 7% तक ही निवेश करना चाहिए. क्योंकि इसमें उतार-चढ़ाव बहुत ज्यादा होते हैं. अगर किसी वजह से बाजार में अचानक गिरावट आ जाती है तो आपकी पूरी पूंजी नहीं जाएगी और आप अचानक होने वाले घाटे से बच जाएंगे. इसलिए कभी भी अपना शतप्रतिशत निवेश थीमेटिक फंड में नहीं करना चाहिए. इस तरह के फंड्स में लंबी अवधि के लिए निवेश करना बेहतर रहता है. लंबी अवधि में रिटर्न मिलने की संभावना अच्छी होती है.
पावर ऑफ कंपाउंडिंग:
अगर आप लंबी अवधि तक किसी भी तरह की म्यूचल फंड में रहते हैं तो पावर ऑफ कंपाउंडिंग का जादू आपके रिटर्न पर दिखाई देता है आइए जानते हैं यह कैसे होता है.
जब आप लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं तो आपको शुरू में निवेश हुए पैसों पर तो रिटर्न मिलता ही है, साथ ही रिटर्न का पैसा भी निवेश हो जाता है और उस नए निवेश पर भी हम रिटर्न प्राप्त करते हैं. उदाहरण के लिए हम कंपाउंड इंटरेस्ट का फार्मूला ही ले लेते हैं. इसमें तीन चीजें मूलधन, ब्याज की दर और अवधि मतलब कितने साल तक हमने निवेश किया है. इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है अवधि की आप जितने साल के लिए निवेश करेंगे, आपको उतना ही ब्याज मिलेगा.
ज्यादातर लोग यह समझते हैं कि म्युचुअल फंड में निवेश करना मतलब शेयर मार्केट में निवेश करना है. यहां तक की जब शेयर मार्केट गिरती है तो बहुत सारे लोग म्यूचुअल फंड से भी निकल जाते हैं जो कि एक गलत निर्णय है. बल्कि जब मार्केट नीचे हो तो वह सबसे उपयुक्त समय है म्यूचुअल फंड में और निवेश करने का. उस समय आपको कम पैसों में ज्यादा यूनिट्स मिल जाएंगी.
ज्यादातर लोग यह समझते हैं कि म्युचुअल फंड में निवेश करना मतलब शेयर मार्केट में निवेश करना है. यहां तक की जब शेयर मार्केट गिरती है तो बहुत सारे लोग म्यूचुअल फंड से भी निकल जाते हैं जो कि एक गलत निर्णय है. बल्कि जब मार्केट नीचे हो तो वह सबसे उपयुक्त समय है म्यूचुअल फंड में और निवेश करने का. उस समय आपको कम पैसों में ज्यादा यूनिट्स मिल जाएंगी.
अगर आप म्यूचल फंड में निवेश करते हैं तो आप बाजार के उतार चढ़ाव पर ध्यान ना दें और लंबे समय के लिए निवेश करें.
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